नरसिंह जयंती 2020: जानें नरसिंह जयंती की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह जयंती मनाई जाती हैं। पौराणिक धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने ‘नरसिंह अवतार’ लेकर दैत्यो के  राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान  नरसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। हिन्दू धर्म में नरसिंह जयंती को बहुत ही बड़ा महत्व दिया जाता हैं। हिन्दू धर्म में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं।

नरसिंह जयंती कथा –

धर्म ग्रंथो के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक एक एक ऋषि थे। उनकी पत्नी का नाम दिति था। उनके दो पुत्र थे। जिनमे एक का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे का नाम हिरण्यकशिपु था। भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष को पृथ्वी की रक्षा करने हेतु वराह रूप धारण कर उसका वध कर दिया था।

 इस बात से दुखी होकर हिरण्यकशिपु ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने का निर्णय लिया। उसने कई वर्षो तक कठोर तप किया। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। इस वरदान से वह सम्पूर्ण लोको का अधिपति हो गया। देवता, असुर हिरण्यकशिपु को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे।

अंहकारी राजा अपनी प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा था। उसी दौरान हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया,उसका नाम प्रह्लाद रखा गया। वह राक्षस कुल का होने के बाद भी नारायण भक्त था। वह अपने पिता हिरण्यकशिपुक का विरोध करता था। उसमें अपने पिता के कोई दुर्गुण नहीं थे।

हिरण्यकशिपु अपने पुत्र का मन नारायण भक्ति से हटाने का बहुत ही प्रयास किया परंतु वह असफल रहा। तब हिरण्यकशिपु ने पुत्र प्रह्लाद को मारने का षड्यंत्र रचा। किन्तु वह उसमे भी सफल ना हो पाया। प्रह्लाद भगवान विष्णु की कृपा से हर संकट से बच जाता। अपने हर प्रयासों में असफल होने पर हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की गोद में प्रह्लाद को बैठाकर उसे जलाने का प्रयास किया। होलिका को वरदान था कि उसे अग्नि से जलाया नहीं जा सकता। परंतु श्री हरि की कृपा से होलिका जल जाती हैं। और प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं होता हैं। इसके पश्चात हिरण्यकशिपु क्रोध से भर गया। उसकी प्रजा भी भगवान विष्णु की पूजा करने लगे।

 तब क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कहाँ हैं, तेरे श्री हरि ? प्रह्लाद ने उत्तर दिया “श्री हरि तो सर्वंत्र हैं ” तब हिरण्यकशिपु ने महल के स्तंभ देखकर कहा कि इस स्तंभ में भी तेरे हरि हैं क्या? प्रह्लाद बड़े विनम्र भाव से बोले हाँ। तभी भगवान विष्णु आधा रुप सिंह व आधा मनुष्य रुप धारण कर स्तंभ से निकल आते हैं। और हिरण्यकशिपु को अपनी जाँघो पर रख अपने  नुखों से उसकी छाती को फाड़ डालते हैं। श्री नरसिंह प्रह्लाद की भक्ति देख प्रसन्न होकर उसे वरदान देते हैं कि जो आज के दिन व्रत रखेगा उसे समस्त सुखो की प्राप्ति होगी तथा पाप से मुक्त होकर उसे परमधाम प्राप्त होगा। इस कारण यह दिन नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता हैं।

नरसिंह जयंती पूजा विधि-

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखना चाहिए। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। उसके पश्चात श्री नरसिंह भगवान व लक्ष्मी जी की प्रतिमा कर विधि से पूजन करना चाहिए । धूप, दीप,पंचमेवा ,पुष्प नारियल से पूजन करे। श्री नरसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन व्रत रखने से सभी पापो से मुक्ति मिलती हैं। तथा भक्तों को परमधाम की प्राप्ति होती हैं। भगवान नारायण सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

 शुभ मुहूर्त –

पूजा समय  बुधवार  6 मई,2020   04:19 से 7:00 तक
 दूसरे दिन –गुरुवार  7 मई 2020   05:35 , सूर्यास्त तक

श्री नरसिंह गायत्री मंत्र

ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि |तन्नो नरसिंह प्रचोदयात

                लक्ष्मी गायत्री मंत्र

पद प्रतिष्ठा,यश ऐश्वर्य और धन सम्पति के लिए

।। ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।।

               श्री नरसिंह आरती

!! ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे

स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे जनका ताप हरे

ॐ जय नरसिंह हरे !!

!! तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी

अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी

ॐ जय नरसिंह हरे !!

!! सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी

दास जान आपनायो, दास जान आपनायो,जनपर कृपा करी

ॐ जय नरसिंह हरे !!

!! ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे

शिवजी जय जय कहकर ,पुष्पन बरसावे

ॐ जय नरसिंह हरे !!

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