पर्यावरण दिवस: 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है

पर्यावरण दिवस 5 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। पर्यावरण को संरक्षित करना तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए सभी को प्रेरित करना एक मानव का कर्तव्य है। क्योकिं बिना पर्यावरण के पृथ्वी पर मानव का जीवन संभव नहीं है.

5 जून को क्यों मनाते हैं-

पर्यावरण को बचाने के लिए बहुत समय पहले सन 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के दौरान आम जनता को जागरूक करने के लिए कुछ अभियान चलाए गए। जिसके द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम को शुरू करते हुए प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस घोषित किया गया। जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैले तथा राजनीतिक चेतना को जागृत किया जा सके। तभी से 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-

जिस प्रकार पर्यावरण के प्रति मानव को जागरूक करने के लिए पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। उसी प्रकार पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 से लागू किया गया। जिसमें सभी  सूक्ष्म जीव-जंतु, पेड़-पौधे,भूमि, वायु अन्य सभी जैविक अजैविक घटकोंं को पर्यावरण के अंतर्गत जोड़ा गया है।

पर्यावरण क्या है-

पर्यावरण दो शब्दों से  मिलकर बनता है। जिसमें परि+आवरण = पर्यावरण होता है। इसमें परि का अर्थ हमारे चारों ओर तथा आवरण का अर्थ घिरे हुए वातावरण से होता है। अर्थात हमारे चारों ओर से घिरे हुए वातावरण को पर्यावरण कहा जाता हैं। पर्यावरण में सभी प्रकार के जीव-जंतु, पर्वत, पठार, मैदान, पेड़-पौधे को सम्मिलित किया जाता है। 

पर्यावरण के प्रकार 

1.प्राकृतिक पर्यावरण

2.मानव निर्मित पर्यावरण

3.सामाजिक पर्यावरण

प्राकृतिक पर्यावरण-

प्राकृतिक पर्यावरण में वे सभी घटक व तत्वों को शामिल किया जाता है जो प्राकृतिक रूप से पाए जाते है। जैसे जीव-जंतु, पेड़-पौधे सभी प्राकृतिक घटक ऊर्जा, तापमान, जल, वायु, मृदा यह सभी प्राकृतिक पर्यावरण कहलाते हैं।

मानव निर्मित पर्यावरण- 

मानव निर्मित पर्यावरण में सभी तत्वों को शामिल किया जाता है जो मानव द्वारा कृत्रिम रूप से बनाए गए हो जैसे कि औद्योगिक, वायु पतन, आर्थिंक विकास, जनसंख्या में वृध्दि यह सभी एक मानव निर्मित पर्यावरण का अंग है।

सामाजिक पर्यावरण- 

सामाजिक पर्यावरण में समाज द्वारा निर्मित रीति-रिवाज, धर्म, जाति अलग-अलग प्रकार की जीवन शैली, धार्मिंक व सांस्कृतिक के अलग रूपों को सामाजिक पर्यावरण कहा जाता है। 

पर्यावरण प्रदूषण-

विश्व में व्याप्त गंभीर समस्या का नाम ही पर्यावरण प्रदूषण है। मानव आज अपने उपयोग के लिए पर्यावरण का दुरुपयोग करता जा रहा है। यही जब नष्ट हो जाएगें तब मानव का जीवन भी असंभव हो जायेगा। मानव व पर्यावरण का आपस में घनिष्ठ संबंध है। इनका एक दूसरे के बिना जीवन असंभव है। आज पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई कर रहे है। जिससे पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। पर्यावरण को प्रदूषित करने में मानव का सबसे बड़ा हाथ रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

जल प्रदूषण-

जल में जब कोई अवांछनीय रूप से परिवर्तन होता है, तब यह जल दूषित हो जाता है इस दूषित जल को जल प्रदूषण कहा जाता है। कल-कारखानों द्वारा निकलने वाले विषैले पदार्थों को, गंदे नाले का पानी, मल-मूत्र, सभी को नदियों  में बहाया जा रहा है। इसी जल को मानव अपने उपयोग में ला रहा है। यही जल मानव जीव-जंतुओं के लिए उपयुक्त है। इनसे कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे हैजा, पेचिस, पीलिया का जन्म हो रहा है। जबकी मानव जीवन के लिए जल सबसे ज्यादा जरूरी है। बिना जल के मानव अपना  जीवन-यापन नहीं कर सकता है। 

वायु प्रदूषण-

वायु प्रदूषण से तात्पर्य कल-कारखानों से निकलने वाला विशैला धुआँ, सिगड़िया आदि वायु में जाकर वायु को दूषित करती है। जिससे वायु प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। वायु में अनेक विशैली गैसें, मोटर साइकल से निकलने वाला धुआँ, परमाणु बम, यूनियन कार्बहाइडेड के रिसाव। इन सभी से पशु-पक्षी मरते जा रहे है। इन सभी से वनस्पतियाँ भी नष्ट होती जा रही है।

मृदा प्रदूषण-

मृदा प्रदूषण से आशय मृदा में कीटनाशक दवा का छिड़काव, खाद्य पदार्थ यह सभी मृदा  की उरर्वकता की शक्ति को नष्ट कर देती है। जिससे मृदा की उपजा शक्ति समाप्त हो जाती है। अतः इसे ही मृदा प्रदूषण कहा जाता है।

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ध्वनि प्रदूषण-

ध्वनि प्रदूषण से आशय कारखानों में लगी बड़ी-बड़ी मशीनों की शोरगुल मोटरसाइकिल की आवाज अतः जो ध्वनि अति तीव्र होती है, जिसे सुनने में अच्छा प्रतीत ना हो वह ध्वनि को दूषित करती है, इसे ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है। ज्यादा तेज ध्वनि से मानव के अंदर चिड़चिड़ापन, मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसी बीमारी को उत्पन्न करती है।

पर्यावरण प्रदूषण व संरक्षण के उपाय-

पर्यावरण प्रदूषण को आज रोका नहीं गया तो यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन को नष्ट कर देगी। मानव के आने वाली पीढ़ियों को बचाना है तो हमें आज ही मिलकर सभी को पर्यावरण प्रदूषण को रोकने का संकल्प लेना होगा। पर्यावरण अनेक प्रकार से दूषित हो रहा है जिस को रोकना सभी का कर्तव्य है। कारखानों से निकलने वाले विषैले धुएँ को वायु में जाने से रोकना होगा तथा अस्पतालों से निकलने वाला अपशिष्ट जिसे कहीं भी मृदा में फेंक दिया जाता है। इस पर रोकथाम लगाना होगा। जिससे मृदा दूषित ना हो। इसी प्रकार जो बड़े-बड़े कारखाने हैं जिनसे अति तीव्र ध्वनि निकलती है इन्हें नगरों से दूर खाली स्थान पर स्थापित करवाना होगा जिससे ध्वनि प्रदूषण ना हो इस प्रकार से हम इन सभी प्रदूषण को कम कर सकते हैं।

  • पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें सबसे पहले लोगों को इसके लिए जागरूक करना होगा।
  •  पर्यावरण संरक्षण के लिए वन संरक्षण पर विशेष बल देने की आवश्यकता है। 
  • वृक्ष पर्यावरण का सर्वश्रेष्ठ साधन होते है। 
  • वृक्ष अशुद्ध वायु को लेकर मानव को स्वच्छ वायु प्रदान करते है।
  • मानव का कर्तव्य है कि वह अधिक से अधिक वृक्ष लगाए।
  • जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
  • वृक्षों की कटाई पर रोक लगाना चाहिए जिससे जंगलों में रहने वाले जीवों से उनका आवास छीना न जा सके।
  •  इनके बिना मानव का जीवन असंभव है इसलिए हमें समय-समय पर मानव को जागरूक करने के लिए आयोजन करना चाहिए। 
  •  जिससे लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके।

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