निर्जला एकादशी: जानिए निर्जला एकादशी व्रत कथा और शुभ मुहूर्त

 हिन्दू कैलेंडर के अनुसार निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह की शुक्ल की एकादशी को मनायी जाती हैं वर्ष भर में 24 एकादशी होती हैं। परन्तु उनमे से एक निर्जला एकादशी ऐसी एकादशी हैं, जिससे इस दिन व्रत करने से वर्षभर की 23 एकादशियों का सम्पूर्ण फल प्राप्त हो जाता हैं। इस वर्ष 2020 में निर्जला एकादशी 2 जून, दिन मंगलवार को मनायी जाएगी। 

निर्जला एकादशी कथा –

पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में महाभारत के महान योद्धा पांडव युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, द्रौपदी व उनकी माता कुंती सभी एकादशी व्रत किया करते थे। परंतु इनमें भीम एकादशी व्रत धारण नहीं करते थे । वह  अपने पेट की भूख शांत करने के लिये भूखे नहीं रह सकते थे। 

           एक दिन महर्षि वेद व्यास पांडुओ के पास आते हैं। तब पांडु पुत्र भीम ऋषि को प्रणाम करते हुए उनसे बोलते हैं, हे ऋषिवर! मैं भी एकादशी व्रत करना चाहता हूँ। परंतु इन 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर सकता हूँ। ऋषिवर आपको तो ज्ञात ही है।  मैं  भोजन के बिना नहीं रह सकता हूँ। ऋषिवर आप मुझे कुछ उपाय बताइए। 

           तब महर्षि व्यास भीम से कहते हैं। पुत्र भीम एकादशी व्रत करना बहुत ही आवश्यक हैं। एकादशी व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती हैं। तथा इससे तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। तुम ज्येष्ठ माह की एकादशी का व्रत करो। इस एकादशी को जल भी ग्रहण नहीं करते हैं। इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का व्रत करने से भीम तुम्हें 23 एकादशी  व्रत का पुण्य प्राप्त होगा। 

              निर्जला एकादशी सभी एकादशियों से श्रेष्ठ एकादशी हैं। इस दिन स्नान दान, व विधि – विधान से व्रत करना  चाहिए । तब से इस दिन भीम ने व्रत करना प्रारंभ किया तथा पूरे विधि – विधान से व्रत का पालन किया तथा भीम को सभी पापों से मुक्ति मिली तथा वह मोक्ष को प्राप्त हुए। 

तब से इस निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी भी कहा जाता हैं। 

निर्जला एकादशी महत्व – 

निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी को पुण्य की प्राप्ति होती हैं। यह एकादशी प्रतिवर्ष की सभी एकादशियों में श्रेष्ठ मानी जाती हैं। इस व्रत में बिना जल ग्रहण किए उपवास करते हैं। इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता हैं ।इस एकादशी का अनुसरण करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। इस व्रत को करने से मनुष्य को अपनी मृत्यु के समय किसी प्रकार का कष्ट सहन नहीं करना होता हैं।यह एकादशी बहुत ही लाभदायक हैं। 

शुभ मुहूर्त –

समयदिन वर्ष
प्रारंभ तिथि 02:57 पी.एमसोमवार 1 जून 2020
समाप्ति 12:04 पी. एममंगलवार 2 जून 2020

निर्जला एकादशी पूजा विधि-

  • निर्जला एकादशी व्रत एक दिन पूर्व दशमी से ही प्रारंभ हो जाता हैं।
  • निर्जला एकादशी के दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। 
  • किसी पावन नदी व गंगा में स्नान करना चाहिए। 
  • तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। 
  • इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करना चाहिए। 
  • उसके पश्चात कथा सुनना चाहिए 
  • इस दिन ब्राह्मणों को दान व जरूरत मंद की सहायता करना चाहिए। 
  • इस दिन किये गये दान का पुण्य फल ज्यादा प्राप्त होता हैं।
  • इस दिन “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ” मंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। 

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