कामिका एकादशी: जानिए एकादशी की कथा व व्रत का महत्व

By | June 2, 2020

हिंदू धर्म के अनुसार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता हैं। हिंदू धर्म में सभी एकादशियों का अपना-अपना अलग ही महत्व है। सभी एकादशियों को श्रेष्ठ माना जाता है। अतः इस कामिका एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अपने पापों से मुक्ति मिलती है। इसमें श्री विष्णु की आराधना की जाती है। इस वर्ष 2020 में यह एकादशी 16 जुलाई दिन गुरुवार को मनाई जाएगी।

कामिका एकादशी कथा-

महाभारत युद्ध काल के वक्त धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान विष्णु से कामिका एकादशी कथा सुनने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्री कृष्ण से कहा मुझे कामिका एकादशी के बारे में जानना है। श्री कृष्ण ने कहा एक बार की बात है जब नारद मुनि ने भगवान ब्रह्म से इस एकादशी के बारे में सुनने की याचना की थी। मैं तुमको वही गाथा सुनाता हूँ। ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा इस कामिका एकादशी के दिन जो भी मानव व्रत धारण करता है। उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करना चाहिए स्वयं प्रभु ने बताया है इस दिन व्रत करने से उनकी अराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। मानव अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए काशी, हरिद्वार, इलाहाबाद, वाराणसी जाता है। परंतु इस व्रत को करने व भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा से पूजन पाठ करने मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

एक और गाथा के अनुसार- 

एक गांव में कोई ठाकुर हुआ करता था। एक बार की बात है उस ठाकुर की लड़ाई एक ब्राह्मण से हो गई थी। ठाकुर ने अपने क्रोध में आकर उस ब्राह्मण का वध कर दिया इस बात का उसे बाद में पछतावा हुआ। वह उस ब्राह्मण से क्षमा मांगने के लिए ब्राह्मण की मृत्यु के उपरांत की क्रिया करना चाहता था। परंतु अन्य ब्राह्मणों ने उसे नहीं करने दिया। आखिर ठाकुर के ऊपर ब्राह्मण हत्या का पाप चढ़ गया। अतः हिंदू धर्म में एक ब्राह्मण सौ ब्राह्मण के बराबर होता है। वह इस पाप का भागी बन गया। कुछ दिनों बाद ठाकुर की मुलाकात एक ऋषि मुनि से हुई उस मुनि से ठाकुर ने अपने अपराध की क्षमा मांगने का उपाय पूछा। तब ब्राह्मण ने ठाकुर को कामिका एकादशी के बारे में बताया तथा उन्हें इस एकादशी का व्रत रखने को कहा तब ठाकुर ने मुनि की बतायी हुई बात के अनुसार पूरी विधि द्वारा भगवान विष्णु की आराधना की तत्पश्चात उसे अपने द्वारा किए गए पापों से मुक्ति मिल गई।

कामिका एकादशी महत्व-

कामिका एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन चक्रधारी विष्णु भगवान की आराधना करने मात्र से सभी के कष्ट दूर हो जाते है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करना चाहिए। इस दिन व्रत करने से हमें अश्वमेघ यज्ञ करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन में आए सभी कष्ट दूर हो जाते है। मनुष्य अपने द्वारा किए सभी पापों से मुक्त हो जाता है, तथा इस दिन व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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शुभ मुहूर्त 

तिथि समय दिन दिनांक 
प्रारंभ 10:19 pm बुधवार 15 जुलाई 2020
समाप्ति 11:44 pm गुरुवार 16 जुलाई 2020
व्रत तोड़ना 05:57 am से 08:19 am शुक्रवार 17 जुलाई 2020

 पूजन विधि- 

  • कामिका एकादशी के दिन प्रातः काल उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए 
  • उसके पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
  •  हमें इस दिन व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। 
  • इसके बाद भगवान विष्णु को स्नान कराना चाहिये।
  • उन्हें फल-फूल, तुलसी पत्र, धूप-दीप, चंदन, अगरबत्ती द्वारा उनकी पूजा करना चाहिए।
  •  इस दिन भगवान विष्णु का पाठ व विष्णु सहस्त्रनाम अवश्य पढ़ना चाहिए।
  •  इसके बाद दूसरे दिन ब्राह्मणों को दान आदि करके अपना व्रत खोलना चाहिए।

विष्णु जी की आरती 

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

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