बुध्द पूर्णिंमा 2020: पढ़िए गौतम महात्मा के वचनो के बारे में

बुध्द पूर्णिंमा वैशाख शुक्ल पूर्णिंमा के दिन मनायी जाती हैं। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस कारण इसे बुध्द पूर्णिंमा के रूप में मनाया जाता हैं। बौध्द धर्म को मानने वालो के लिए यह एक प्रमुख त्यौहार हैं।

नाम गौतम बुद्ध 
बचपन का नाम सिध्दार्थ
जन्म 563 ईसा पूर्व 
स्थान लुम्बिनी,नेपाल 
पिता का नाम शुध्दोधन
माता का नाम मायादेवी
धर्मबौध्द
तिथिवैशाख पूर्णिंमा

वैशाख पूर्णिंमा

बौध्द ग्रंथों के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिंमा के दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध को बिहार के तीर्थ नामक स्थल बौधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें बुध्दत्व की प्राप्ति हुई थी। महात्मा बुध्द ने बुध्द पूर्णिंमा के दिन ही कुशीनगर में देह त्याग दिया था। जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया हैं।

महात्मा बुध्द के जीवन की इन घटनाओं के कारण बुध्द पूर्णिंमा को एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं। हिन्दू धर्म की मान्यताओ के अनुसार भगवान विष्णु का नौवा अवतार महात्मा बुध्द को कहा जाता हैं। इस कारण इस वैशाखी पूर्णिंमा व बुध्द पूर्णिंमा के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती हैं। बौध्द धर्म  में आस्था रखने वाले इस दिन बुद्ध पूर्णिंमा का त्यौहार मनाते हैं। इस पूर्णिंमा को हिन्दू व बौध्द धर्म के लोग मनाते हैं।

शुभ मुहूर्त –

  • तिथि प्रारंभ- 07:44 ,6 मई 2020
  • समाप्ति  – 04:14 ,7 मई 2020

बौध्द धर्म के त्रिरत्न हैं –

  • बुध्द
  • धम्म    
  • संघ   

महात्मा बुध्द के वचन –

1- कई हजारों खोखले शब्दों से अच्छा, केवल वह एक शब्द है जो मन में शांति लाए।

2- आपका असत्यवादी होना ही आपकी विफलता का मुख्य कारण हैं।

3- अगर आप सच में अपने आप से प्रेम करते है तो आप कभी भी दूसरों को दुःख नहीं पहुंचा सकते। 

4- आकाश के लिए पूरब और पश्चिम में कोई भेद नहीं है, परन्तु लोग अपने मन में भेदभाव को जन्म देते हैं और यही सच है ऐसा विश्वास करते रहते हैं।

5- हम जो भी और जैसा भी सोचते हैं, वही बनते जाते हैं।

6- अगर आपको मन की शांति चाहियें तो दूसरों से ईर्ष्या करना छोड़ दें।

7- यदि आप अपना मार्ग नहीं बदलेंगे तो निश्चित ही आप वही पहुँच जायेंगे जहाँ आप जा रहे हैं।

8- बिना स्वास्थ्य के जीवन बेकार है, वह केवल एक पीड़ा की स्थिति और मौत की छवि के समान है।

9- जिस तरह  एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपक रौशन किए जा सकते है, उसी तरह खुशियाँ बाँटने से बढ़ती जाती हैं, कम नहीं होती।

10- मैं यह कभी नहीं देखता की क्या किया जा चुका है, मैं सदैव देखता हूं कि अभी और क्या किया जाना बाकी है।

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